इसलिए कहने लगा इश्क़ को उल्टा सीधा
जिस तरह से वो बताते हैं तुझे उज़्र अपने
इसका मतलब तो तग़ाफ़ुल ही है सीधा सीधा
हम अगर तुझमें समा जायें तो हैरत कैसी
आके गिरता है समंदर में ही दरिया सीधा
हमने उस नाम की हुरमत को बचाये रक्खा
लोग करते रहे जिस नाम पे पैसा सीधा
क्यों मुझे बीच में खींचा गया मालूम नहीं
मेरा ख़ुद से तो नहीं था कोई झगड़ा सीधा
उस ज़माने की मुहब्बत के उसूलों पे चलें
इस ज़माने में भला कौन है इतना सीधा
मैं अगर भाग भी निकलूँ तो पकड़ जाऊँगा
शहर ए क़ातिल में नहीं एक भी रस्ता सीधा
-हर्षित मिश्रा
2 टिप्पणियां:
Bahut accha likha hai aapne
thnx
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